अविवाहित जवान बेटी की रोज चुदाई

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मेरी बेटी अनुराधा अब जवान हो चुकी थी. एक बार में एक लड़का और लड़की क्लास रूम में चुदाई करते हुए पाये गए थे. तबसे सभी टीचर थोडा डरने लगे थे. जब अनुराधा का बर्थडे पड़ा तो उसने मुझे अपने घर पर बुलाया. फिर २ महीने बाद मेरा बर्थडे पड़ा तो मैं अनुराधा को बुलाया.उस दिन मैं तो उस पर मर मिटा जा रहा था. गुलाब का फूल लग रही थी अनुराधा. जहाँ मैं साढ़े ५ फिट का था वहीँ वो ५ फिट १ इंच की थी. अभी अभी नई नई जवान हुई थी. मम्मे भी अब बड़े होकर पक गए थे. अब वो भोगने और चोदने खाने लायक सामान हो गयी थी. हो सकता है आप लोग कहे की पंकज मिश्र कितना चोदू आदमी है, अपनी मैडम की लड़की की ऐसा कह रहा है. पर इसके जवाब में मैं तो कहूँगा की जब लंड खड़ा होता है और फन मारता है तब माँ की माल लगती है.

लंड को तो बस वही ५ इंच गहरा छेद चाहिए होता है. खड़ा लंड तो तब ही बस शांत हो सकता है. सिर्फ बाते पेलने से तो लंड शांत नही होता. इसको तो बस १ छेद चाहिए होता है चोदन के लिए. फिर कैसी मिस और कैसी टीचर.जब अनुराधा आ गयी तब ही मैं केक काटा. इसमें कोई दोराय नही की मैं उससे प्यार करने लगा था. मैं आज सोच भी लिया था की आज अनुराधा को प्रोपोस मार दूँगा. अनुराधा का बदन भरा हुआ था, उसी से मैं उसके मस्त भरे बदन का अंदाजा लगा सकता था. जैसा फैशन टीवी पर दिखाते है की लडकियां पतली पतली बांस के खंबे की तरह सिकडी पहलवान होती है, अनुराधा उस तरह की बिलकुल नही थी. बिलकुल देसी मछली थी. आह उसके चोदने को मैं कबसे बेक़रार था. कितने सपने देखे थे उसके लिए मैंने. पर साधना मिस से मैं बहुत डरता था, मेरी बड़ी फटती थी उनसे. क्यूंकि बचपन से वो और उनकी डंडी ही मैंने देखि थी. सारे लड़के भी बहुत डरते थे उसने.यह सेक्स कहानी आप चुदाई कहानी साइट डॉट कॉम पर पड़ रहे है।बर्थडे का केक कट गया तो सब मेहमान फिर से अपनी अपनी मंडली में खो गए. मैंने अनुराधा को अपने बगीचे में ले आया. एक गुलाब का फूल तोडा और उसको दे दिया.अनुराधा !! आई लव यू!! मैंने कहा वो बिलकुल से झेप गयी. कुछ देर तक तो कोई जवाब ना दिया. मैं तो टेंशन में आ गया. क्यूंकि मैं उसे सिर्फ चोदना खाना ही नही चाहता था, पर प्यार भी बहुत करता था. इसलिए मैं थोडा इमोसनल भी था. कुछ देर बाद अनुराधा हँसी और हाँ में उसने सिर हिला दिया. दोस्तों, मैं इतना खुश हुआ की लगा मैंने दुनिया जीत ली है. लगा मैं बिल गेटस बन गया हूँ और दुनिया का सबसे आमिर आदमी हूँ. मैं अनुराधा को अपने कमरे में ले आया.वो भी अपनी मर्जी से आई थी. मेरे घर में हर तरह पार्टी चल रही थी. हनी सिंह के गाने बज रहें थे. मेहमान ही मेहमान थे. मेरे कमरे में मेरी मौसी की लडकियां बैठी थी, मैं उसको बाहर निकला.

अनुराधा मेरे साथ अंडर आ गयी. वो भी जान गयी थी की हम दोनों कुछ ना कुछ करेंगे. अंदर आते ही मैंने अनु [प्यार से मैं उसको कभी कभी अनु भी कह देता था] को सीने से लगा लिया. हम दोनों लिप लोक होकर किस करने लगे. अनुराधा बड़ी ही मासूम थी, जरा भी चंट नही थी. बड़ी सीधी लड़की थी तभी मुझे उससे इश्क हुआ था. मैंने अनुराधा को बाँहों में भर लिया, उसके होठों पर गर्म गरम चुम्बन लेने लगा. पहली बार किसी लड़के के होंठ पी रहा था. बड़ी बात होती है ये.अनु के होठ पीते पीते हम दोनों गरम हो गए. मैंने अनु की आँखों में बस झाका और मुझे जवाब मिल गया. यही तो प्यार में होता है, बात करने  की जरुरत ही नही होती. सारी बातें बस आँखों आँखों में ही हो जाती है. वो भी चुदने को अपने मन से तैयार थी. अनु ने पिंक रंग की कुर्ती पहन रखी थी. बिलकुल घर का देसी लाग लग रही. मैंने उसके पुरे बदन को बाहों में भर लिया और हर जगह सहलाने लगा. उसकी, कंधे, पीठ पर मेरा हाथ गया. फिर उसकी कमर पर मेरा हाथ गया. और फिर उसके हिप्स पर मेरा हाथ गया. भरे भरे गोल गोल हिप्स को छूते ही मेरे दिल ने कहा रोज रोज अनुराधा तो तुमको मिलेगी नही पंकज. मौके का फायदा उठाओ और इस कच्ची कली को चोद लो. वरना कल किसने देखा है. कहीं साधना मिस किसी और स्कूल में पढाने चली गयी तो.यह सेक्स कहानी आप चुदाई कहानी साइट डॉट कॉम पर पड़ रहे है।बस मैंने अनुराधा को अपने बेड पर घसीट लिया. वो भी चुदासी थी और कोई नु नुकर उसने नही किया. मैं भी उसके बगल लेट गया. चुदाई की सुरवात चुम्मा चाटी से हुई. काफी देर तक तो चिपका चिपकी चली. आँखों के इशारे में चुदाई का संकेत हो गया. मैंने खुद अनुराधा की गुलाबी कुरती को उतार दिया. जैसे जैसे उसके बदन से एक एक कपड़ा निकलता गया अनु[ अनुराधा] के भव्य रुपए के दर्शन होते गए. अंत में वो अपने आलसी प्राकृतिक रूप में आ गयी. वो १५ १६ साल की लड़की अपने असली भव्य रुप में आ गयी. वो वस्त्रविहीन हो गयी. मैं भी कपड़े निकाल दिए. अनु के रूप को मैं निहारता रह गया. छरहरा इकहरा बदन आज कल की छोकरियों के बिलकुल विपरीत जो फास्ट फ़ूड खा खाके मोटी और भद्दी हो जाती है. मेरे सामने उसका नया नया यौवन से परिपूर्ण बदन खुला हुआ था. अनुराधा के चेहरे पर नूर ही नूर झलक रहा था, उसकी मासूमियत की खूबसूरती. उसके कुंवारे होठ जिसको अभी तक किसी लड़के ने नही पिया था.

उसके उभरे चिकने चुच्चे जिसके चूचकों पर १० रुँपये के सिक्के की साइज़ के काले घेरे थे. जिसको अभी तक किसी से नही चखा था. बार बार मैं अनुराधा के चेहरे को चूमने लगा. मन तो हुआ की इसकी मासूमियत को नष्ट ना करू. इसको ना चोदू. ऐसे ही काम चला लूँ, पर इस महापापी लंड का क्या करता. इसको तो ४ इंच का छेद चाहिए ही ना. ये मेरी बात ना सुनता. इसलिए मैं चुदाई की दिशा में बढ़ गया. सबसे पहले अनु [अनुराधा] के दोनों गुलाबी कुंवारे होंठों को पी कर उनकी सारी लाली चुरा ली. जैसे मधुमखी फूल पर बैठ कर उसका सारा नूर सारा पराग चुरा लेती है. मेरे हाथ लगातार उसके चुच्चों पर लगातार गश्त लगा रहें थे जैसी पुलिस रात में पुरे शहर में गश्त लगाती. अनु के इस भव्य रूप के मैंने आज पहली बार दीदार किया था. स्कूल ड्रेस में तो वो मुझे हमेशा बहन जी टाइप की लगी थी पर आज ऐसे उसके खुले नग्न रूप में वो मुझे आदर्श प्रेयसी लग रही थी.मैंने पूरी तरह से उसको अपने में भर लिया. उसके सिर को मैंने प्यार से पकड़ लिया और उसके सिक्के जैसे काले घेरों को पीने लगा.यह सेक्स कहानी आप चुदाई कहानी साइट डॉट कॉम पर पड़ रहे है। अनुराधा के नंगे बदन की खुसबू मेरे नथुने में चली गयी. मैं अनु को पूरी तरह से अच्छे से भोगना चोदना चाहता था. कहीं कोई कोर कसर नही छोड़ना चाहता था. मैं उसको खुद में लपेट लिया था, रुमाल की तरह वो मुझे सिमट सिकुड गयी थी. साधना मिस से उसके लिए सोने की चैन बनवाई थी. नई नई सोने की चेन उसके गले में बहुत जच रही थी. एक बार तो लगा की मैं उसके साथ गोवा या कोई पर्यटन स्थल पर आया हूँ और हनीमून मना रहा हूँ. उसकी बगलों में बड़ी बारीक़ हल्के हल्के बाल थे. अभी अनु [अनुराधा] पूरी तरह से बालिग भी नही हुई थी और मैं उसको भोगने जा रहा था. उसने अपने लचीले पतले हाथों से मुझे जकड रखा था.

अनुराधा के बदन में बड़ी नवीनता थी. चिकना बदन था जिसको अभी तक किसी से नही चोदा था. मैं उसके दोनों दूध पीने में डूबा था. इसके साथ ही दूसरे खाली दूध को हाथ में लेकर होर्न की तरह दबा देता था. अनु चिहुक उठती थी. उसके रूप और खूबसूरती पर मैं आसक्त था. बाहर मेरे जन्मदिन पर मेरे दुसरे दोस्त और रिश्तेदार और उसके खून चूसूं बच्चे हनी सिंह के गानों पर डांस कर रहें थे. मैं इधर अपनी साधना मिस की लड़की के साथ महा चुदाई की महा पाठशाला लगा रहा था. लहकते, मचलते उसके जिस्म को लेकर मैं कहीं दूसरी दुनिया में खो गया था. अब नीचे की तरह बढ़ रहा था, उसका मखमली पेट, उसकी नाभि को मैंने चूम लिया. अनु खिलखिलाकर हंस पड़ी. नाभि से पेडू से होकर हल्की हल्की बारों की बड़ी महीन बारिक लाइन थी जो उसकी बुर तक जाती थी. चीटियों की तरह मैं एक एक बाल को चूमता चूमता मैं अनु के पेडू पर आ गया. फिर बुर पर आ पंहुचा जैसे अंग्रेज सोने की तलाश करते करते भारत आ पहुचे थे.यह सेक्स कहानी आप चुदाई कहानी साइट डॉट कॉम पर पड़ रहे है।बेटी की बुर पर हल्की हल्की झांटे थी. उसकी चूत की तरह उसकी झांटे भी अभी कुंवारी थी. मैंने अपना सिर उसकी झांटों के बादल में डाल दिया और कहीं खो गया. मैंने अपना मुह उसकी झांटों में छिपा लिया जैसे जब मासूम छोटा बच्चा अपनी माँ से रूठ जाता है तो घर में कहीं किसी कोने में छिप जाता है. हम दोनों प्रेमी प्रेमिका का चुदाई का बड़ा मन भी था, समय भी था , मौका भी था और दस्तूर भी था. अब तो चुदाई होनी लाजमी थी. हम दोनों एक दूसरे में पति पत्नी की तरह समा गए थे. अनुराधा को आज इस तरह पाकर मैं खुद को बिल गेट्स जितना अमीर समझ रहा था. मैंने झांटों को बीच से अपनी उँगलियों से हटाया तो चूत मिल गयी. मैं पीने लगा. हल्का नमकीन स्वाद मेरे मुह में आया. अनु के चेहरे की भाव भंगिमांए बदने लगी. मैं लपर लपर करके उसकी चूत पीने लगा.

अंततः मैंने अपना लंड बेटी की भोसड़े पर रख दिया और धक्का मारा. कई दफा लंड इधर उधर भाग गया. मैंने उसकी दोनों जाँघों को पकड़ा, लंड को रिसेट किया और अंडर पेला. उसकी कुंवारी पवित्र सील टूट गयी. मैं अनु को चोदने लगा. उसके सायद बिठाये वो निजी पल सायद बड़े खास थे मेरे लिए. कुछ देर बाद वो चूत का छेद खुल गया. मैं सहजता से अपनी जानेमन को लेने लगा. वो मुझसे लिपट गयी थी , जैसी मुझे अपना पति, अपना दिलबर मान चुकी थी. मैं उसे घपाघप पेल रहा था. कभी उसे दर्द होता कभी नही, पर नए नए चूदाई का सुख तो मेरी अनु उठा रही थी. उसकी नाजनीन पलकें कभी गिरती, कभी उठती, कभी उसकी भौहे फैलती, कभी सिकुड़ती. मैं भवरे की तरह, किसी मधुमख्खी की तरह अनु का सारा नूर , उसका सारा पाराग लूट रहा था. फिर कुछ पलों बाद मैंने अपना अमृत अनु की आत्मा में छोड़ दिया. हम दोनों प्रेमी प्रेमिका आज एक हो गए. हम दो जिस्म थे, पर आज एक जान हो गए. हम दो शरीर थे, पर आज चुदाई के बाद हम एक आत्मा हो गए. मैं भी इधर पूरा हो गया, अनु भी उधर आज चुदकर सम्पूर्ण नारी हो गयी. समय से पहले ही उसे चोदकर मैंने उसके यौवन की कलि को फूल बना दिया. फिर हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहन लिए और बाहर आ गए. अभी भी पार्टी चल रही थी. हनी सिंह का ‘ आंटी पुलिस बुला ले गी, फिर पार्टी यूँ ही चलेगी’ ये गाना अभी भी बज रहा था. मेरी और अनु की पार्टी को पूरी हो चुकी थी.यह सेक्स कहानी आप चुदाई कहानी साइट डॉट कॉम पर पड़ रहे है। दोस्तों, जिस बात का डर था वही हुआ, साधना मिस के पति को कहीं सरकारी नौकरी मिल गयी और वो हमारा स्कूल छोड़ के चली गयी. मेरा प्यार मेरी मुहब्बत अनुराधा भी उसके साथ चली गयी. मैं बहुत रोया, कई दिन मैंने खाना नही खाया. पर मैं मजबूर था. आखिर में क्या करता. मेरी मुहब्बत अनु चली तो गयी पर उसका प्यार आज भी मेरे दिल में जिन्दा है और हमेशा जिन्दा रहेगा.कैसी लगी हम डॉनो बाप बेटी की सेक्स स्टोरी , अच्छा लगी तो शेयर करना , अगर कोई मेरी बेटी की चुदाई करना चाहते हैं तो उसे अब जोड़ना चुदाई की प्यासी लड़की.

बाप बेटी की चुदाई - हिंदी सेक्स कहानियाँ

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मेरी माँ कैंसर से स्वर्ग सिधार गयी तब पापा और मैं अकेले अकेले जीने लगे. मैं उस वक्त छोटी थी अब पापा मुझसे जादा प्यार करने लगे थे. एक तो मैं पापा को अपनी माँ की याद दिलाती थी उपर से पापा अन्तर्मुखी थे बाहर लोगों से कम बोलते थे. तो फ्रेंड्स अब पापा की जिन्दगी में सिर्फ मैं थी और मेरी जिन्दगी में सिर्फ पापा. पापा वकील थे सुबह ही कचेहरी चले जाते थे. मैं शाम को उनका बेस्ब्री से इंतजार करती थी. घर पर एक आया उन्होंने मेरे देखभाल के लिए रखी थी.

जो मेरा ख्याल रखती थी जब पापा शाम को आते थे तो मैं उनका बेसब्री से इंतजार करती थी. जैसे ही वो आते थे मैं उनकी गोद में चढ़ जाती थी. पापा मेरे होंठों पर चूमते थे. तब मैं 8 साल की थी मैं भी थोड़ी अन्ततर्मुखी थी. टीवी देखने का तो मुझको बड़ा शौक था सारा सारा दिन टीवी देखती थी. इस तरह दोस्तों मैं धीरे धीरे बड़ी हो गयी और २३ साल की जवान मॉल हो गयी. माँ के मरने के बाद पापा ही मुझको नहलाते थे. मेरे बाल धुलवाते थे, तौलिये से मेरे बाल पोंछते थे और मुझे निकर चड्ढी पहनाते थे. पापा मुझको मेरे होंठों पर किस करते थे. पर जब मैं बड़ी और जवान हो गयी तो चीजे बदल गयी अब पापा ने मुझको होंठों पर चूमना चाटना बंद कर दिया. दोस्तों, इस दुनिया में कोई भी बाप अपनी बेटी को बुरी नियत से नही देखता है. 

मेरा पापा भी कोई क्ल्युगी पापा नही थे. वो जान गए थे की अब उनकी लडकी जवान और सायानी हो गयी है. मैं भी जान गयी थी की भले ही आपका बाप आपको कितना प्यार करता हो पर जवान लडकी को होंठों पर चूमने के माने दुसरे होत्ते है इसका दूसरा मतलब निकलता है. दोस्तों मुझको किसी से चूत चुदाई और लंड के बारे में किसी दोस्त ने नहीं बताया पर ये सब मैंने टीवी से सिख लिया था.ये सेक्स कहानी,चुदाई कहानी साइट डॉट कॉम पर पड़ रहे है। घर में २ टीवी थे. पापा ने एक मेरे कमरे में लगवा रखा था. पापा को नही पता था, पर रात ११ बजे के बाद उसके एक चैनल पर ब्लू फिल्म आती थी. २३ साल की होते होते मैं चुदाई के बारे में सब जन गयी थी.

मैं रात रात जग कर चुदाई वाला वो चैनल देखती रहती थी जब पापा मुझको रात में चेक करने आते थे तो तुरंत मैं टीवी बंद करके सो जाती थी इस तरह दोस्तों मैं चुदाई के बारे में सब जान गयी थी एक दिन पापा ने कहा की उनके बदन में बहुत दर्द हो रहा है तो मैं उनकी मालिश करने लगी पापा ने सारे कपड़े निकाल दिए पापा अभी मुस्किल ने ४० के होंगे अच्छे खासे गबरू जवान थे पर मेरी खातिर दुबारा शादी नही की उनको दर था कहीं नयी बीवी मेरे साथ अच्छा बर्ताव करे या बुरा बस दोस्तों यही सोचकर पापा ने दुबारा शादी नहीं की पापा ने अपने सारे कपड़े सिर्फ अन्डर्विअर छोड़कर सब निकल दिया था आप भी पापा बिलकुल सनी देओल से कम नहीं लगते थे वो बेड पर लेट गए मैं उनके बदन के उपर से निचे जड़ी बूटी वाला तेल लगाने लगी पहले तो मैं पापा को वैसे ही प्यार करती थी एक बाप की नजर से देखटी थी पर आज न जाने क्यूँ मैं उनको एक प्रेमी की नजर से देख रही थी क्यूंकि आजकल मैं रात में वो चुदाई वाला चैनल देखती थी

अब मैं अपनी चूत में ऊँगली करके मुठ भी मारने लग गयी थी मेरे इस कांडों के बारे में पापा को कुछ नहीं पता था आज जब शाम के वक़्त पापा के हाथ पैरों में मालिश कर रही तो अचानक से ख्याल आया महिमा! तू इनदिनों लंड ढूँढ़ रही है एक अच्छा ख़ासा जवान लंड तो तेरे सामने ही है ये सोचकर मैं पापा के पैरों और जांधों में खूब रगड रगड़ कर मालिश कर रही थी,  अरे बेटी महिमा!! आज तो तू बड़ी अच्छी तरह से मालिश कर रही है कुछ चाइये क्या तुझको बेटी?? पापा ने कहा,दोस्तों जी तो हुआ की कह दूँ की पापा और क्या मांगू बस दुनिया की सबसे किमती चीज अपना बड़ा सा मोटा सा लंड दे दीजिये पर मैंने नहीं कहा मेरे मालिश करने से पापा का लंड खड़ा हो गया वो सोचे कहीं बेटी कुछ गलत मतलब न निकाले इसलिए एक तौलिया लेकर बाथरूम में भाग गए मैंने उस वक़्त एक ढीला सलवार सूट पहन रखा था.

पापा को मेरे दूधिया मम्मो के दर्शन हो गए, बेटी! अब तू बड़ी हो गयी है इतने ढीले कपड़े मत फना कर पापा ने कहा मैं समझ गयी की आज पापा को मेरे दूध के दर्शन हो गये है जब पापा बाथरूम में तौलिया लेकर अचानक से भाग गयी तो मुझको थोड़ी हैरानी हुई मन में सवाल उठा देखो अन्दर क्या कर रहे है दरवाजे के छेद से झाककर देखा पापा मुठ मरने में मस्त थे क्या मोटा लैंड था किसी मोटे गन्ने से कम नहीं था सुपाडा गुलाबी था और लंड काला था पापा आनखे बंद किये थे और सायद मेरा ही ध्यान कर रहे थे और खट खट मुठ मार रहे थे मैं मजे से ये सीन देखने लगी १५ मिनट तक पापा मुठ मारते रहे फिर उनके गन्ने जैसे लंड से बन्दुक की गोली की तरह ५ ६ बार मॉल की पिचकारी निगली पापा के घुटने चुत्तड जांघ और पैर की ऐडीयां ऐठ गयी पापा का चेहरा बता रहा था की उनको जन्नत का मजा मिल गया था.

मैंने सोचा की अगर पापा किसी दिन मुझको चोदे तो उनको और साथ ही मुझको भी जन्नत का मजा मिल जाये मैं अपने कमरे में आ गयी और यही सोचने लगी की कैसे पापा से चुद जाऊं कोई भी बाप आसानी ने अपनी सगी लडकी को तो चोदेगा नहीं एक दिन पापा के नहाने से पहले मैं बाथरूम में घुस गयी मैं नहाने लगी जब पापा नहाने के लिए आने लगे तो मैं अचानक से बाहर निकली मैंने अपनी छाती पर सिर्फ एक गुलाबी रंग की तौलिया बाँध रही थी मेरी गोरी गोरी पतली टाँगे घुटनों तक खुली थी उपर मेरे दोनों कंधे चिकने साफ दुधिया चमक रहे थे मेरे काले लम्बे बाल किसी काली बहती नदी से लग रहे थे दोस्तों मैंने जान भूझकर तौलिया बड़ी हलकी सी बाँध रखी जैसे ही मैं बाहर निकली पापा सामने खड़े थे मैंने पीछे हल्का सा हाथ तौलिया की गाँठ पर लगाया अचानक तौलिया सर्र की आवाज करती निचे सरक गयी मैंने डरने का नाटक किया पापा बिलकुल झेप गए पर मेरा खुबसुरत जिस्म तो उनकी आँखों में कैद हो ही गया,ये सेक्स कहानी,चुदाई कहानी साइट डॉट कॉम पर पड़ रहे है। 

कैसे तौलिया बांधती हो? ठीक से बाँधा करो बेटी अब तुम बच्ची नहीं रह गयी पापा ने कहा जल्दी से तौलिया उठा के मेरे सीने पर डाल दी पापा ने मेरे खुले नंगे सीने को साफ साफ देख लिया मैं पछतावे का नाटक किया जल्दी से वहां से भागी तो फर्श पर पड़े पानी पर पैर पड़ा मैं फिसल गयी एक बार फिरसे मेरी तौलिया खुल गयी पापा मुझको उठाने उठे तो वो भी फिसल गए और मेरे उपर ही गिर गए मैंने उनको बाहों में ले लिया उन्होंने भी मुझको बाहों में भर किया कुछ सेकंड को वो भूल गए की मैं उनकी सगी बेटी हूँ मेरे होंठों पर उन्होंने अपने होंठ रख दिए,मैं भी उनके होंठ पीने लगी जवान नंगी लडकी को पाकर सब भूल गए मेरी रूप के आंच ने उनकी साधना तोड़ दी मैंने भी कहा की आज मौका मिला है महिमा इसको मत छोड़ मैंने पापा को बाँहों को कस लिया हम दोनों एक दुसरे को जमकर पिने लगे मैं नंगी तो थी ही पापा का हाथ मेरे कसे कसे गोल मम्मो पर चला गया मैंने कुछ नहीं कहा पापा मेरी छातियाँ दबाने लगे मैंने भी दबाने दिया पापा के चेहरे पर मेरे काले भीगे बाल बिखर गये थे पापा ने मेरे भीगे बालों को एडजस्ट किया और मेरे मम्मे पिने लगे मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी कुछ मिनट में ही पापा का लंड खड़ा हो गया

बेटी! तू इतनी मस्त मॉल कब हो गयी ?? मैं तो यही सोचता था की तू आज भी छोटी है पर तू तो बिलकुल पक चुकी है पापा बोले

बेटी! मैं तेरे रूप का रस पीना चाहता हूँ पर डर है तू कहीं कल किसी को इस कांड के बारे में बता न दे बेटी महिमा क्या तू चुदाई के बारे में कुछ जानती है पापा ने पूछा

पापा मैं चुदाई के बारे में सब जानती हूँ आपने जो टीवी मेरे कमरे में लगवाया है न उनमे रात में एक चैनल पर ब्लू फिल्म आती है अब तो मैं मुठ भी मारने लगी हूँ मैंने पापा से कहा पापा खुश हो गए

पापा आप मुझको बिना कोई टेंशन को चोदो मैं खुद आपसे चुदवाना चाहती हूँ मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी ये हमारा राज सिर्फ बाप बेटी के बिच रहेगा दुनिया में इसके बारे में किसी को पता नहीं चलेगा आप मुझको बेफिक्र होकर चोदो मैंने पापा से कहा उनको पूरा यकीन दिलवाया अब पापा बेफिक्र हो गए मस्ती से मेरे दूध पीने लगे आज दोस्तों मेरा सपना सच होने वाला था रोज टीवी में चुदाई देखती थी पर आज मैं खुद चुदने वाली थी पापा किसी बच्चे की तरह मेरे दूध पीने लगे मैं मस्त हो गयी मेरी बुर गीली होने लगी मॉल मेरी चूत से निकलने लगा मैंने पापा के सर पर अपना हाथ रख दिया जिस तरह से पापा मेरी माँ के दूध पीते थे ठीक उसी तरह मैं उनको अपना दूध पिला रही थी पापा ने तो आज जन्नत का मजा ले लिया अब मेरे पतले गोर पेट को चूमने चाटने लगे दोस्तों मैं अपनी माँ को गयी थी जिस तरह मेरी माँ इतनी गोरी थी की अगर कमरे में रख दो तो उजाला हो जाए ठीक उसी तरह मैं भी इतनी गोरी थी की पापा की तपस्या टूट गयी.

पापा अब मेरी नाभि को चूमने चाटने लगे गहरी खूब गहरी नाभि थी पापा जीभ को मेरी नाभी में डालने लगे मुझे एक अजीब सा सुख मिलने लगा मेरे पेडू में हलचल होने लगी जी किया की अब पापा से ख दू पापा अब मुझको मत तडपाओ जिस तरह मम्मी को चोदते थे ठीक उसी तरह जोर जोर से मुझको चोदो पर मैंने कुछ नहीं कहा पापा बड़े प्यार से धीरे धीरे मुझको चोदना चाहते थे मैं उनको डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी पापा मेरी गहरी गोली अति सुन्दर नाभि में अपनी जीभ डाले और डाले ही जा रहे थे मैंने अपनी दोनों छातियों को हाथ में ले लिया और मुह तक लाकर मैं अपनी काली निपल्स को चाटने लगी,अब पापा को बड़ी जोर की चुदास लगी मेरी बुर पर पापा आ पहुचे मेरी गोरी चिकनी बुर का दीदार किया कुछ दिन पहले ही मैंने झांटे बनायीं थी मेरी चूत बड़ी खुबसूरत और गद्देदार थी पापा का तो दोस्तों दिल खुस हो गया.महिमा बेटी तू जानती है जब तेरी माँ नयी नयी शादी के बाद आई थी पहली रात को ठीक ऐसी ही चूत थी उनकी पापा बोला मैं हस दी

तो पापा मम्मी की तरह मुझको भी चोदिये आप मैंने कहा पापा निहाल हो गये मेरी बुर पीने लगे मुझको तो जैसे जन्नत मिल गयी रोज bf में देखती थी आज खुद किसी को अपनी बुर पिला रही थी पापा अपनी लम्बी जीभ फेर फेरकर मेरी बुर पिने लगी मेरी चूत अब और क्रियाशील होकर फूलकर कुप्पा हो गयी पापा चूत में ऊँगली करने लगे साथ ही मेरी चूत के हसींन होंठों को वो पीने लगे मुझको चरम सुख मिलने लगा मैंने दोनों पैर खोल लिए पापा जान गयी की बेटी अब चोदने को ख रही है पापा ने कपड़े निकल दिए मेरी बुर के दरवाजे पर अपना वो अलसी निग्रो जैसा सुपाडा रखा और जोर का ढाका मारा मेरी सिल टूट गयी,ये सेक्स कहानी,चुदाई कहानी साइट डॉट कॉम पर पड़ रहे है। गाढ़ा चिपचिपा खून मेरी चूत से बह निकला पापा मुझको पेलने लगे कुछ देर बाद मुझको दर्द ख़तम हो गया कमर उठा उठा के मैं अपने ही सगे बाप से चुदवाने लगी.

सारे रिश्ते नातों को हम दोनो बाप बेटी आज भूल गये थे पापा ने मुझको आधे घंटे चोदा और मेरी नयी नयी फटी चूत में ही अपना मॉल निकाल दिया जैसे ही उन्होंने अपना लौडा बहार निकला पीछे ने उनका मॉल भी मेरी चूत ने निकल आया फिर कुछ देर बाद पापा ने मेरी गाड़ भी मारी उसके बाद तो दोस्तों चुदाई का ऐसा सिलसिला चला की बस पूछिए ही मत दिन रात चुदाई होने लगी हम बाप बेटी में एक सीक्रेट डील हो गयी खाना बनाने वाले नौकर को हमने निकाल दिया की कहीं उसको हमारे पाप और काण्ड के बारे में न पता चल जाए,अब हम बाप बेटी अलग अलग कमरे में नहीं बल्कि एक ही कमरे में एक बिस्तर में सोते मैंने मोबाइल पर ४ बजे का अलार्म लगा देती जब जाती और पापा का लैंड चुस्ती पापा जान जाते इसका चुदवाने का मन है मुझको सुबह सुबह की २ राउंड चोदते फिर नहाने चले जाते.

मैं फटाफट पापा का नाश्ता बनती उनके बैग में टिफ़िन रख देती शान को पापा ६ बजे आते उस्से पहले मैं सब काम कर लेती अब एक नई साडी उनका इंतजार करती रात १० बजे तक हम दोनों बाप बेटी खाना खाकर बिस्तर पर आ जाते और फिर होती चुदाई पलंगतोड़ चुदाई चुदवा पापा से चुदवा चुद्वाकर मैं गर्भवती हो गयी,महिमा बेटी अब मैं तेरी चूत के बिना नही जी सकता पापा बोले १ हफ्ते में हम दोनों ने चंडीगढ़ छोड़ दिया और पटियाला आ गये यहाँ हमको कोई नहीं जानता था जब कोई मेरे बारे में पूछता पापा कहते मेरी बीवी है लव मैरिज की है और तबसे मेरे प्यारे पापा मुझको हर रात चोदते है कभी नागा नहीं किया,कैसी लगी हम डॉनो बाप बेटी की सेक्स स्टोरी , अच्छा लगी तो शेयर करना , अगर कोई मेरी चूत की चुदाई करना चाहते हैं तो उसे अब ऐड करो Lund ki pyasi kamsin chut.
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